बढ़ते कदम

निशां पर चलो, निशां अपने भी बनाते चलो)

7 Posts

28 comments

Shipra Parashar


Reader Blogs are not moderated, Jagran is not responsible for the views, opinions and content posted by the readers.

Sort by:

इस बरसी का आखिर औचित्य क्या है?

Posted On: 16 Dec, 2013  
1 Star2 Stars3 Stars4 Stars5 Stars (3 votes, average: 4.33 out of 5)
Loading ... Loading ...

Others में

1 Comment

सूफी मुहम्मद झूठ बोल रहा था

Posted On: 26 Nov, 2013  
1 Star2 Stars3 Stars4 Stars5 Stars (1 votes, average: 5.00 out of 5)
Loading ... Loading ...

Others में

16 Comments

और…सूफी ध्यान मुहम्मद यहां भी झूठ बोल रहा था!

Posted On: 26 Nov, 2013  
1 Star2 Stars3 Stars4 Stars5 Stars (1 votes, average: 5.00 out of 5)
Loading ... Loading ...

Others में

0 Comment

सूफी ध्यान मुहम्मद जी ने नाम बदल लिया – 2

Posted On: 17 Nov, 2013  
1 Star2 Stars3 Stars4 Stars5 Stars (2 votes, average: 3.00 out of 5)
Loading ... Loading ...

Others में

6 Comments

सूफी ध्यान मुहम्मद जी ने नाम बदल लिया – १

Posted On: 17 Nov, 2013  
1 Star2 Stars3 Stars4 Stars5 Stars (1 votes, average: 1.00 out of 5)
Loading ... Loading ...

Others में

3 Comments

जिसके दिमाग में भूसा भरा हो

Posted On: 15 Nov, 2013  
1 Star2 Stars3 Stars4 Stars5 Stars (2 votes, average: 4.50 out of 5)
Loading ... Loading ...

Others में

1 Comment

अधजल गगरी छ्लकत जाय

Posted On: 14 Nov, 2013  
1 Star2 Stars3 Stars4 Stars5 Stars (4 votes, average: 3.00 out of 5)
Loading ... Loading ...

Others में

1 Comment

नवीनतम प्रतिक्रियाएंLatest Comments

आदरणीया शिप्रा जी, सादर! इस बरसी का कोई औचित्य शायद न रहा हो, पर हम बरसी तो मानते आए हैं, बस परम्परा के नाम पर याद के पटल पर धूल जो पड़ जाती है, उसे साफ़ करने के लिए! ...वह भी ज्यादातर समय में मीडिया ही याद दिलाता है. नहीं तो इस बरसी के अलावा और भी सभी बरसियों का क्या औचित्य रह गया है. चाहे वो २६ जनवरी हो या १५ अगस्त! नवरात्रि हो रावण वध! एड्स दिवस हो या नो स्मोकिंग, नो टोबैको डे, कोई फर्क पड़ा है क्या?... अब रही बात मीडिया और राजनीति की, आम आदमी पार्टी को मिली अप्रत्याशित सफलता से सभी घबरा से गए और आनन फानन में सरकारी लोकपाल विधेयक पास कर दिया गया. केजरीवाल की चमक को कम करने के लिए अन्ना का सहारा नहीं लिया गया? ये सभी राजनीतिक चालें अब जनता समझने लगी है और समय पर अपना फैसला सुनाती भी है ... पर उनका फैसला सुनता ही कौन है???? अभी काफी समय लगेगा समाज, और देश को सुधरने में!... एक अच्छे आलेख के लिए बधाई!

के द्वारा: jlsingh jlsingh

न मैं आपकी दोस्त हूं, न मैं आपकी दुश्मन.... आपने पूछा था कि मुझे कौन सी मिर्ची लग गई...अब एक सीधा सा जवाब दे रही.. आप जागरण पर लिखते हैं सूफी जी.. और आपने जागरण को ही चुनौती दे डाली!..... जिसने आपको अभिव्यक्ति का माध्यम दिया आपने उसे ही चुनौती दे डाली!! आपसे किसी को बैर नहीं...आपकी श्रेष्ठता पर किसी ने ऊंगली भी नहीं उठाई...अगर आप अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता की बात करते हैं तो आपकी ही तरह देश का हर नागरिक अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता रखता है... और किसी के मत से मतभेद जताने का अधिकार सबके पास है. पर इस अधिकार में हर किसी की मर्यादा का खयाल रखा जाता है.. आपसे बस उसी मर्यादा की अपेक्षा जताई थी जागरण जंक्शन ने. आपने तो प्लेटफॉर्म की मर्यादा का खयाल भी नहीं रखा...उसे ही चुनौती दे डाली. क्या सिर्फ विवादित टिप्पणियों से लाइम लाइट में आने के लिए ये सही है? आपके ज्ञान को लोग यूं भी महत्ता देंगे...(हालांकि मुझे यकीन है आपको वह नहीं चाहिए)..पर शायद आपने वैसी कोई कोशिश न की हो कभी..क्योंकि आप शायद दंगे-फसाद वाली महत्ता पर यकीन रखते हैं...थकने की उम्मीद तो आपसे हम यूं भी नहीं करते क्योंकि हमारे लिए तो थकान एक नए सृजन का सूचक है..और आपकी सोच में नएपन की उम्मीद हमें नहीं..दंगे-फसाद में हम यकीन ही नहीं करते...

के द्वारा: Shipra Parashar Shipra Parashar

अच्छा तो भ्रमित आप हुए हैं...!! वैसे बिल्कुल सही कहा दिनेश जी.. किसी को समझने के लिए उसे पढना जरूरी है. पर आप खुद पर यह लागू नहीं करते क्या? आप खुद ही मान रहे हैं कि मेरे सारे पोस्ट नहीं पढ़े हैं(“....मैंने आपके सारे पोस्ट तो नहीं पढ़े हैं और मेरी वह प्रतिक्रिया सारे पोस्टों के बारे में थी।“), मेरा पोस्ट पूरा नहीं पढ़ा (“...मैं उसे पूरा पढ़ने का साहस नहीं कर पाया”)...फिर भी उसपर टिप्पणी दे दी..!! मेरे पोस्ट का आशय आप बिना पढ़े, जो पढ़ा उसे भी बिना पूरा पढ़े कैसे समझ गए? और नहीं समझे तो उसपर अपनी राय ‘टिप्पणी स्वरूप’ कैसे दे दी? कैसे पता चला आपको कि मेरे आलेख में विरोधाभास है..आलेख उद्देशहीन है?... जाने क्यों अपनी ही बातों का विरोध करते हैं...खुद ही बोलते हैं, खुद ही उसे नहीं मानते...कमाल है!! मैंने न आपके ज्ञान पर उंगली उठाई दिनेश जी, न सूफी जी के ज्ञान पर कभी उंगली उठाई है.. लेकिन अगर आप पूरा पढ़ते तो आपको इस व्यंग्य का आशय समझ आता न... चलो माना कि आपसे इतना लंबा, ऊबाऊ पोस्ट पढ़ा नहीं गया.. साहस नहीं कर सके पढ़ने का.. लेकिन उसपर ये टिप्पणी किस सोच से दे दी! अब आप ही तय करें कि अजीब प्राणी कौन है..और किसकी सोच कितनी काल्पनिक है... जहां तक सूफी जी से आपके विरोध और मित्रता संबंधों का सवाल है.. सूफी जी को तो अपने पोस्ट पर विरोध करने वाले ही चाहिए.. जिससे उन्हें लोकप्रियता मिले.. वे ‘बदनाम भी हुए तो नाम होता है’ पर यकीन करते हैं... आप पूछ लें जरा उनसे कह रहे थे कि आजकल यहां कोई उनका विरोध नहीं कर रहा... इसलिए कुछ सम्मानित करने वाले अनिल जी जैसे और कुछ विरोध करने वाले आप जैसे लोगों को साथ रखते हैं.. हाथी के दांत दिखाने के और, खाने के और! ‘विदुषी’ से विशेषित करने के लिए धन्यवाद! वैसे हम यह उपाधि आपको भी देना चाहेंगे.. ‘शैली’ से सूफी जी की किसी महिला मित्र का अंदाजा हम बिल्कुल नहीं लगाएंगे.. पर समझाने के लिए शुक्रिया!

के द्वारा: Shipra Parashar Shipra Parashar

आदरणीया, विदुषी शिप्रा जी। पढ़ने का साहस न कहने का तात्पर्य यह नहीं कि मैंने उसे  बिल्कुल ही नहीं पढ़ा आपको इसका आशय यह निकालना चाहिये कि मैं उसे पूरा  पढ़ने का साहस नहीं कर पाया। लोग बाल में खाल निकालते हैं और आप हैं कि  खाल में से बाल निकाल रहीं हैं। आपने सच कहा कि मैं अजीब प्राणी हूँ,   क्या इंसान ही अजीब प्राणी है। क्या आपको नहीं लगता कि आप भी अजीब प्राणी हैं। यदि लगता है तो अजीब हैं ही और यदि नहीं लगता है तो यह भी अजीब ही होगा। मैंने आपके सारे पोस्ट तो नहीं पढ़े हैं और मेरी वह प्रतिक्रिया सारे पोस्टों के बारे में थी। संभवतः आपको ज्ञात नहीं है कि मेरा और सूफी जी का पुराना और गहरा वरोध है।  उनकी सोच से नहीं, उनकी शैली है। शैली से मतलब आप उनकी किसी महिला मित्र  से नहीं लगा लेना। मैं अपने आपको सूफी जी और आपकी तरह बुद्धिमान नहीं मानता। यदि आपने मुझे उनके समकक्ष रखा, यह तो मेरे लिये गौरव की बात है। लेकिन मैं अपने आपको ऐसा नहीं मानता। इसलिये मिथ्या अंहकार के वशीभूत नहीं हो  सकता। मैं भ्रमित इसलिये हुआ हूं कि आपकी पोस्ट लिखने का मतलब नहीं समझ पाया। आपकी व्यंगात्क शैली का आशय नहीं ज्ञात कर सका मैं आप और सूफी जी  जिनता तो  बुद्धिमान नहीं हूँ लेकिन इनता अज्ञानी भी नहीं हूँ  कि अपने लिखे शब्दों का अर्थ न  समझ सकूँ मैं आपकी इस बात पर कैसे यकीन करूँ कि मुझे विरोधाभास का  अर्थ नहीं मालूम माना मेरी योग्यता आपके बराबर नहीं है लेकिन फिर भी मैंने  हिन्दी साहित्य से कम से कम एम ए तो किया ही है आपमें आप मुझमें बहुत ही  बुनियादी अंतर है आप जो लिखती हैं उसे सच मानती हैं और में वह लिखता हूँ  जो मुझे सच लगता है। आपने मेरे प्रति केवल काल्पनिक सोच बनाई है। किसी  को समझने के लिये उसे पढ़ना जरूरी है। 

के द्वारा: dineshaastik dineshaastik

दो बातें हो सकती हैं... या तो आपने मेरा हर रिप्लाई पोस्ट पढ़ा है या नहीं पढ़ा है.. आदरणीय दिनेश जी.. पिछ्ली टिप्पणी में आपने मुझे इतना लंबा पोस्ट लिखने की वीरता के लिए बधाई दी थी.. और कहा था कि इसे आप पढ़ने का साहस नहीं कर सके.. इस बार आप मेरी बातों में ‘विरोधाभास’ होने की बात कह रहे हैं.. यहां मुझे ऐसे अजीब लोगों से ही सामना क्यों हो रहा.. मेरे सारे पोस्ट एक-दूसरे से जुड़े हुए हैं.. या तो आपने सारे पोस्ट पढ़े मैं ये मानूं या कि आपकी पिछली बात कि आपने बस लास्ट का ‘विश्राम और व्यस्तता’ को पढ़ा.. मैं यकीन किस बात का करूं समझ तो मुझे यही नहीं आ रहा... ‘विरोधाभास’ आपने सारे पोस्ट को बिना पढ़े ही जान लिया... अजीब श्रेणी के प्राणी हैं आपलोग.. ऐसा जान पड़ता है आप भी अनिल जी की श्रेणी के हैं.. Superb! बुद्धिमान सूफी जी लगता है आजकल नई नीति अपना रहे हैं... दोस्तों का उदाहरण जो वे लिखा करते हैं, लगता है Live दिखाकर यकीन दिलाना चाहते हैं... सूफी जी! I must say… आपके दोस्त भी आपकी तरह ही बुद्धिमान हैं..

के द्वारा: Shipra Parashar Shipra Parashar

के द्वारा: Sufi Dhyan Muhammad Sufi Dhyan Muhammad

के द्वारा: Shipra Parashar Shipra Parashar

मुझे लगता है तुम सच में कोई लड़की या वैसी ही कुछ हो, इतनी चर-चर और कच्चर-पच्चर कोई लड़की ही कर सकती है...!! तुम्हारे दोनों चें-पें(पोस्ट) को पढ़ लिया है मैंने, कल तक रिप्लाई कर दूंगा... लेकिन इसबार मैं कोई कोई ब्लॉग नहीं लिखने जा रहा हूँ तुम पर, लोगों को लग रहा है कि 'शिप्रा' कोई नहीं है 'सूफी' खुद से शिप्रा बन कर खुद की विरोध कर रहा है, या फिर अपने किसी दोस्त को बोल कर अपना विरोध करवा रहा है, तुम्हारी अजीब सी हरकत के कारण आज कल कोई खुल कर मेरा विरोध नहीं कर रहा है..और ये सिर्फ लोगों को ही नहीं मुझे भी लगने लगा है, ऐसा कैसा कि तुम खाली मुझ से रिलेटेड पोस्ट ही करती हो, न किसी को कमेंट करती हो न ही किसी और विषय पर कुछ लिखती हो...और न ही कोई तुम्हारे पोस्टों पर कोई आ कर कमेंट करता है??? 'सद्गुरु जी' भी मेरा विरोध करते हैं लेकिन आज कल वो भी बेचारे शांत हैं, सरिता जी ने उनको जा कर समझा दिया है कि 'सूफी' आप को चिढ़ा रहा है, वो मज़े लेने के लिए ऐसा करता है.... लोगों से ज्यादा मेरे दोस्तों को लगता है कि 'शिप्रा' फेक ब्लॉग है | मुझे ये पता नहीं चल रहा कि ऐसी कौन सी मिर्ची तुमको लग गयी कि ६ के ६ पोस्ट मेरे पर डाल दिया ...??? लड़ाकू टाइप की लड़की हो क्या तुम...?? तुम्हारा कुछ जागरण से लेना देना है क्या...जब से तुमने मुझ से लड़ना शुरू किया है मेरा कोई भी पोस्ट फ़ीचर्ड नहीं हो रहा है..??? एक काम करो लोगों को बताओ कि तुम हो...उनको एहसास कराओ की 'शिप्रा' जैसी कोई 'जीवात्मा' इस वक़्त पृथ्वी पर मौज़ूद है और वो सच में सूफी का खुलासा कर रही है, लोगों को बताओ कि तुम क्या हो...!! तुम्हारे दोनों पोस्ट अच्छे हैं...मैं अच्छे से जवाब देना चाहता हूँ, ताकि तुम्हारी बौद्धिक-क्षुधा शांत हो, लेकिन लोगों को मज़ा नहीं आ रहा है... अब मेरे पास दो आप्शन है, पहला 'तुम्हारा जवाब तुम्हे मेल कर दूँ या फिर यहाँ कमेंट कर दूं'...!!

के द्वारा: Sufi Dhyan Muhammad Sufi Dhyan Muhammad

के द्वारा: अनिल कुमार ‘अलीन’ अनिल कुमार ‘अलीन’




latest from jagran